नमस्ते दोस्तों, मैं मुंबई से हूँ। मैं 24 साल का हूँ और अविवाहित हूँ। मैं अपनी सौतेली माँ और सौतेले भाई-बहनों के साथ चेंबूर इलाके में रहता हूँ। हाल ही में मेरी शादी मेरी असली माँ से हुई और मेरी पूरी दुनिया बदल गई। इससे पहले कि मैं आपको बताऊँ कि यह कैसे हुआ, मैं आपको अपने अतीत के बारे में कुछ बता दूँ। Meri Maa Ayesha Meri Rakhil Bani
मेरे पिताजी का जन्म लखनऊ के एक शुद्ध ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनका नाम माधव था। 19 साल की उम्र में उन्हें एक मुस्लिम लड़की शाबेरा से प्यार हो गया, जो 18 साल की थी। उन्होंने अपने प्यार को दोनों परिवारों से छुपाया क्योंकि उनकी शादी करना मुश्किल था। 2 साल के प्यार और परिपक्वता प्राप्त करने के बाद वे दोनों लखनऊ से भाग गए और महाराष्ट्र के सांगली में बस गए क्योंकि मेरे पिताजी का वहाँ एक दोस्त था जो उन्हें बसने में मदद कर सकता था।
पिताजी ने अपने दोस्त की मदद से कपड़ों का छोटा सा व्यवसाय शुरू किया। मेरे पिताजी और माँ ने सांगली में शादी की और 2 साल तक वहीं रहे। शादी के बाद मेरे पिताजी हिंदू धर्म में आस्था रखते रहे और माँ इस्लाम में आस्था रखती रहीं। उन्होंने अपना धर्म नहीं बदला। मेरी माँ शाबेरा ने मुझे 1992 में सांगली में जन्म दिया और मेरा नाम समीर रखा क्योंकि यह हिंदू और मुसलमानों में आम नाम है। मेरे जन्म के बाद पिताजी मुंबई चले गए और छोटे पैमाने पर कपड़ा बनाने का काम शुरू कर दिया। अब वे बेफिक्र हो गए और अपने कुछ रिश्तेदारों से संपर्क करके अपने परिवार से शादी की मंजूरी लेने लगे। लेकिन यह खबर मेरी माँ के परिवार वालों तक पहुँच गई और एक दिन उनके परिवार वाले हमें ढूँढते हुए मुंबई आ गए। अब मैं आपको हिंदी में बताता हूँ कि आगे क्या हुआ।
मेरी माँ की फैमिली वालो ने मुंबई के गुंडो का सहारा लेके जबरदस्त किया मेरी माँ को अपने साथ उठा ले गए। मेरे डैड को भी बहुत मारा और मुझे अपने डैड के पास ही छोड़ दिया। मेरे डैड ने माँ का कर्ज लेने के लिए कोर्ट का सहारा लिया मगर उनके पास शादी का कोई पूर्व भी नहीं था और घरवालों पर दबाव था और ढाक धमकी की वजह से मेरी माँ भी कोर्ट में पलट गई। उनके परिवार वालों ने उल्टा मेरे पिता पर अपनी बेटी को भगा ले जाने का और रेप करने का केस कर दिया। जिस में मेरे डैड को कड़ी परेशानी के बाद छुटकारा मिला।
माँ के घरवालो ने उनकी शादी कानपुर में उनसे 15 साल बड़े मुस्लिम विधुर से कर दिया।
बैड मी मेरे डैड ने भी मुंबई में हाय मराठी ब्राह्मण औरत सुनंदा से कर ली। क्यों कि मैं बिल्कुल 2 साल का था और मुझे संभालने के लिए किसी की जरूरत थी। मेरी सौतेली माँ सुनंदा बहुत अच्छी थी।
वो मुझे बिल्कुल अपने बच्चे जैसा ही प्यार करती थी और बुरे में सुनंदा ने भी 1 बेटे को और 1 बिटिया को जन्म दिया। मेरे ये सौतेले भाई-बहन आयुष 20 साल का है और शैलजा 18 साल की है। वो भी मुझे बड़े भैया का सन्मान देते हैं। हम सब बहुत मिलजुल कर रहने लगे। हम सब सगे भाई-बहन जैसे ही हैं। मेरी सौतेली माँ सुनंदा भी मेरी असली माँ जैसी ही थी। मेरी असली माँ शबेरा का तो मुझे चेहरा भी याद नहीं था।
अभी 2 साल पहले मेरे डैड की डेथ हो गई तो मैं उनका बिजनेस देखने लगा। अभी तो हमारी भिवंडी में रेडीमेड गारमेंट्स की बहुत बड़ी फैक्ट्री है और अंधेरी में ऑफिस है। पिताजी की मौत के बाद मुझे ऑफिस संभाले हुवे कुछ 7-8 महीने हुए होंगे तभी 1 दिन मेरे ऑफिस में मुझे मिलने के लिए 1 मुस्लिम औरत आई। जब मैंने उनको मेरी चेंबर में बुलाया तो वो मुझे देखती ही रही। उनकी आँखों में से आँसू निकल रहे थे।
मेरे पूछने पर वो दबी हुई आवाज में सिर्फ इतना ही बोल पाई “समीर, तू समीर है…मेरा बेटा….” और फिर वो छोड़र आंसुओं से रोने लगी…मैं कुछ देर तो देखता ही रहा…दिमाग सुन्न हो गया था…मैं आदमी नहीं रह सकता था कि मुझे जन्म देने वाली मेरी मां शबेरा मेरे सामने है…दिमाग ने तर्क लड़ाया कि वो शबेरा ही है उसकी क्या गारंटी…मगर दिमाग के सामने दिल की जीत हुई…
माई मुझे जन्म देने वाली माँ को देख के बिल्कुल इमोशनल हो गया…माई मेरी कुर्सी पर से उठा और माँ के पास जाके उनके आँसू पूछने लगा तो वो मुझे लिपट पड़ी और रोना और तेज हो गया…मेरी आँखे भी आँसू ओ से भर गई…बड़ी मुश्किल से मैंने मेरी माँ को शांत किया। उनको पानी पिला के कुर्सी पर बिठाया। माई भी उनके पास वाली कुर्सी पर बैठ गया और माँ की पीठ सहलती हुई उनसे बात करने लगी।
माँ ने ट्रुटक ट्रुटक आवाज में बताया कि उनका पति के साथ वो बहुत दुखी थी। वो उनको बहुत मारता था और मज़दूरी करवाता था। उनसे माँ को 3 बिटिया और 1 बेटा हुवा। 2 बड़ी बिटिया की शादी हो चुकी है। 6 महीने पहले उनके पति ने उनको तलाक दे दिया तो वो अब अपने 18 साल के बेटे शमीम और 16 साल की बेटी आयशा के साथ मुंबई चली आई, ये सोच के शायद मेरे डैड से कुछ मदद मिल जाएगी।
और अभी उनको ऑफिस पर आके पता चला कि मेरे डैड की मौत हो चुकी है। वो भिंडी बाजार में किसी रिश्तेदार के वहां रुकी हुई थी। जब तक उनका दिल हल्का न हुआ तब तक मैंने भी उनकी सारी बातें सुनी और मेरे और पिताजी के बारे में बताया और हमारे परिवार के बारे में बताया। पूरा 3 घंटा कैसे बीत गया पता ही नहीं चला। बातो बातों में वो बार बार मुझे सीने से लगा लेती थी और बीच बीच में रो लेती थी। वो मुझे गालो पे, शर पे सभी जगह बार बार दोस्त भी रही थी। माई भी सालो के बुरी मिली बिछड़ी हुई माँ के आगोश में बार बार समा जाता था।
फिर मैंने उनको बाहर ले गया और वो जहां पे रुकी थी वहां तक छोड़ आया। वाहा पे माई मेरे सौतेले भाई-बहन शमीम और आयशा को मिलने नहीं रुका मगर मैंने माँ को बताया कि उनके लिए घर का बंदोबस्त कर के मैं कल शाम तक उनको लेने आऊंगा। माई जब रात को घर पहुंचूं तो मैंने दिन की बात मेरी सौतेली मां सुनंदा को बताना नहीं सोचा ये सोच के कि उनको दुख होगा।
दूसरे दिन मैंने 1 एस्टेट एजेंट से माहिम में 1 फ्लैट किराए पर ले लिया और वहां पे जरूरी फर्नीचर लगवा दिया। फ़िर मैं मेरी माँ, शमीम और आयशा को वहाँ ले गया। रात का खाना हम सब ने मिलकर खाया। मैंने घर पे बता दिया कि मैं देर आऊंगा। हम सब मैं बहुत सारी बातें हुई। मेरी माँ ने बहुत सारा समय बिताया था। बातो बातो में वो मुझे बोल रही थी कि मैं बिल्कुल मेरे डैड जैसा ही दिखता हूँ। Muslim Sex Story
आज भी वो मुझे बार-बार अपने सीने से लगा कर बहुत सारा प्यार बरसा रही थी। जब मैंने घर का बाकी का सामान लेने के लिए और घर चलाने के लिए उनके हाथो में 40000 रुपये थमा दिया तो वो बहुत भाव विभोर हो गई और मुझे फिर से बहो में लेके रोने लगी। मैंने माँ की पीठ सहला दी तो वो मुझे जोर से लिपट गयी। ये दो दिनों में पहली बार मुझे महसुस हुआ कि माँ की बड़ी बड़ी चुचियाँ मेरे सीने में दब रही थी। मैंने ये ख्याल मेरे दिमाग से मिटाने की कोशिश की, क्यों कि वो मेरी माँ थी, मुझे जन्म देने वाली मेरी माँ।
मैंने कुछ भी बात मेरी माँ सुनंदा को नहीं बताई। मैं अब बार बार मेरी रियल मॉम शाबेरा को मिलने लगा और उनके घर पे भी टाइम बिताने लगा। शमीम और आयशा का स्कूल में एडमिशन भी करवा दिया। अब मेरी माँ शाबेरा भी मुझसे बिल्कुल खुल गई थी और अपनी जवानी की सारी बाते, जब वो मेरे पापा के प्यार में थी वो सब मुझे बताती रहती थी, और फिर मुझे ये भी बोलती थी कि अब वो मुझमें ही मेरे पापा के दर्शन कर रही है।
अब मैं भी उनके लिए मेरे पापा की तरह सोचने लग गया था और उनपे ढेर सारा प्यार बरसा रहा था। अब जब भी वो मुझे चूमती थी, सहलती या भेटती थी तो मेरे बदन में रहा बेटा मर जाता था और 1 मर्द जग उठता था। काई बार मैंने मेरी सोच को दबाने की कोशिश की मगर सफल रहा। वो हमेशा सलवार कमीज पहनती थी और बाहर जाते वक्त नकाब भी डालती थी। फिर भी अब मुझे मेरी माँ बहुत ही सुंदर लगती थी।
वो 5’4” की गोरी चिति और पतली औरत थी। जिनके स्तन शायद 36 के थे और इतने ही बड़े गोल गोल कुल्हे थे। माई माँ के बदन के बारे में ज्यादा नहीं सोचता था फिर भी जब वो मुझे छोड़ देता था तो उनके बड़े बड़े मुमाने मेरे सीने से टकराते थे और माँ के बदन के बारे में सोचने लग जाता था पता ही नहीं चलता।
अब वो काई बार मुझे मेरे डैड के नाम माधव जैसी वो मधु कहती थी, इस नाम से बुलाती थी। जब भी वो मुझे मधु कह के बुलाती थी तो उनका चेहरा लाल लाल हो जाता था और आँखों में अजीब सी चमक आ जाती थी। मैंने सोचा था कि जब मैं अपने पति को ढूंढ रही हूं तो मैं भी निराश ना करुंगी। अब हम दोनों बार-बार बाहर कुछ कम से या घुमने भी जाने लगे। जब भी हम बाहर जाते थे तो वो मेरा हाथ ऐसे पकड़ लेती थी जैसे मैं उनका बेटा नहीं मगर पति हूं।
मैं उनको रोकने की कोशिश नहीं करता मगर मन ही मन सोचता था कि माँ को क्या चाहिए बेटा या पति? इसका भी जवाब 1 दिन मिल गया। उस दिन हम शॉपिंग निपटेक बांद्रा बैंड स्टैंड की और घुमने चले गए। माँ मेरा हाथ पकड़ के मुझे पीछे की तरफ ले गई, जहाँ पे समंदर की और जाने का रास्ता था। आस पास में बाई बड़ी चट्टाने थी और एरिया सम सैम था। कहीं-कहीं कोई प्रेमी जोड़े छुप छुप के बैठे थे। ऐसी ही एक जगह मां ने ढूंढ निकाली और मुझे वहा अपने पास बिठाया। माई मॉम का दिल बात समझ गया था। Hindi Sex Story Family
माँ वाहा पे मुझे अपनी और खिंचती हुई बोली “मधु, मेरे मधु, तू अब भी जिंदा हो तेरे बेटे के रूप में…आजा मेरे मधु…।” इतना बोल के माँ ने मुझे जोरो से अपने बदन पे भैंस लिया। माई भी मॉम को सहलाने लगा…क्यूं कि इतने दिनों में मॉम की हरकतों से मैं भी काफी कुछ खुल चुका था और मॉम को देख के हाई एक्साइटेड हो जाने लगा था। माँ ने मेरे चेहरे को चूमते हुए अपने दोनो होथ मेरे होथ पे लगा दिया।
मेरे होंठ कब खुल गए पता ही नहीं चला और हम दोनों एक दूसरे के होठों को चूमने और चूसने लग गए। माँ ने अब अपनी जिभ मेरे मुँह में डाल दी तो मैंने उसे चूसा लगा और भूल गया कि मैं मेरी माँ के साथ हूँ, जिसने मुझे जन्म दिया है। वो मुझे लपेट रही थी तभी मैंने उनको कमर से सहलते हुवे मेरे हाथों को ऊपर की और ले गया। जब मेरी उंगली माँ के स्तनों को छुई तो माँ सिहर उठी माँ ने मेरा निचला होंठ को दांतो तले दबा लिया।
मेरा हाथ अब माँ के स्तनों का जयाजा लेने लगे तो माँ ने भी अपना हाथ मेरी झाँघो पे लगा लिया और सहलाने लगी। शुद्ध 10 मिनट की स्मूचिंग के बाद जब हमारे होठ अलग हुए तो मैंने माँ की आँखों में आँखे डाल के देखा। माँ ने अपनी नज़र नीचे कर ली और बोली “बेटा, मुझे माफ़ कर दे मैं बहकावे में आ गई थी।”
अब मैं पूरा एक्साइटेड हो चुका था, अब मेरे लिए रुकना असम्भव हो गया था। मैंने माँ को फिर से मेरी और खींचते हुए कहा “नहीं अब तू मेरी माँ नहीं मगर मेरी शबेरा हो, मेरी प्यारी शबेरा, माई तूजे मधु बनके प्यार करुंगा, तेरा मधु, जिसका प्यार पाने के लिए तू जिंदगीभर तरसती रही…।” Antarvasna Sex Stories
बेटा ये तू क्या बोल रहा है?” उनकी आवाज में कम्पन था। मैने कहा “हां मेरी जान, मेरी सबेरा…मैं तेरे लिए मधु ही बनके रहूंगा…वैसी भी माई सुनदाजी को ही अपनी मां मानता हूं और उनका ही बेटा हूं…..तेरा तो मेरी मधु है..” कहकर मैंने फिर से मेरे होठ उनके होठ पर रख दिया।
काफ़ी देर तक हम दोनो एक दूसरे को चूमते सहलते रहे। जब मैंने माँ के कपड़ो के अंदर हाथ डाला तो माँ बोली “मधु, तुम क्या कर रही हो? यहाँ पे ओपन में नहीं..चल घर चलते हैं” हम दोनों फिर घर आ गए। जब हम घर पहुंचे तो आयशा ट्यूशन क्लास में जाने की तैयारी कर रही थी। शमीम का क्या करना वो मैं सोचने लगा। फिर मैंने शमीम को कहा मेरा 1 काम करेगा क्या”
वो बोला “1 क्या 1 हज़ार काम करेगा अपने भैया का तो”। मैंने 1 किताब का नाम देखकर बताया कि वह किताब सिर्फ चर्चगेट के सामने वाली दुकान में ही उपलब्ध है, वह ले आएगा क्या? वो ख़ुशी ख़ुशी मेरा काम करने निकल पड़ा, जो अब 2-3 घंटों से पहले आने वाला नहीं था। उधर आयशा भी ट्यूशन में जाने को निकल गई। मैंने दरवाजा बंद किया और मेरी माँ शबेरा को बहो मैंने भींच लिया। वो भी अब मुझे मधु समाज की शरारत करती हुई प्यार करने लगी।
मैंने शबेरा को उठाया और बिस्तर पर पटाका, फिर उसके ऊपर मैं भी कूद पड़ा। फ़िर 1 लाम्बा स्मोकिंग। माई उनका होठ काट रहा था और वो मेरे कंधो पे अपने नखुन गड़ा रही थी। मैंने उनका काम उठा दिया…बाप रे क्या मखमली त्वचा थी उसकी कमर और पेट की…मैं उनका कमर और पेट को चूमने लगा…धीरे-धीरे पूरा कमीज ऊपर उठा दिया…
काली ब्रा में उनकी बड़ी बड़ी चुचियाँ बाहर निकलने को मचल रही थी। मैंने ब्रा के ऊपर से ही माँ के स्तनों को सहला दिया और फिर चूमने लगा…माँ लगतार मेरे कंधो, पीठ और कमर को सहला रही थी। मैंने माँ को ऊपर उठाया और ब्रा का हुक खोल ने की कोशिश की..हुक टाइट हो के फसा हुआ था। जब वो आसान से नहीं खुला तो माँ हंसने लगी और पलट कर बोली “पहली बार है क्या?”
“हा डार्लिंग, मेरे डैड को भी तूने सिखाया था, मुझे भी तू सिखा दे” मैंने कहा था हमने उनकी ब्रा का हुक खोल दिया। उनकी मार्बल जैसी गोरी पीठ को चूमने की लालसा नहीं रोक पाई। उनकी पीठ को चूमते हुए आगे की और हाथ करके मैंने माँ की दोनों चुचियो को थाम लिया। माँ ने हल्की सी सिस्कारी बुलायी. माई और उत्तेजित हो गया और माँ के स्तनों को मसलने लगा। माँ ने मेरी उंगली पकड़ कर अपने निपल्स के आस पास घुमाया तो मुझे समझ आ गया कि माँ क्या चाहती है।
मैंने माँ की निपल्स के बाहर बने अरोला के काले सर्कल पे उंगली घुमाने लगा और बिच बिच में उनकी निपल्स को टटोलता रहा। माँ अब बारी बारी सिस्कारिया लग रही थी. अब मैंने माँ की दोनों निपल्स को एक साथ ही पकड़ के दबा दिया तो माँ के मुँह से बड़ी सिसकारी निकल पड़ी। मैंने माँ को मेरी और किया और उनके स्तनों को उठा लिया।
माँ के स्तन लचीले थे फिर भी बड़े होने की वजह से काफी सुंदर दिख रहे थे। मैं माँ के दोनों स्तनों के साथ काफी समय तक खेलता रहा और उन्हें चूमता रहा। फिर मैंने माँ की बाईं चूची को मुँह में भर लिया तो माँ मेरे शरीर पर हाथ रखा के मुझे नीचे की और दबाने लगी। माँ का दूसरा हाथ अब मेरी दोनों टैंगो के बीच से घुमता हुआ मेरे लंड के ऊपर पहुँच गया। वो मेरे जीन्स के ऊपर से ही मेरे लंड को दबाने लगी।
मैंने अब तक माँ की चूत पर ध्यान ही नहीं दिया था, जब माँ ने मेरे लंड को दबाया तो मैंने भी माँ की सलवार के ऊपर से ही उसकी टैंगो के बीच वाले हिस्से को सहलाने लगा। फिर बेसबरा होके मैंने माँ की सलवार का नाड़ा खींच लिया। मैंने सलवार के अन्दर हाथ घुसेड़ दिया। ओह….माँ की पैंटी बिल्कुल गीली हो चुकी थी….
माँ की चूत में से पानी निकल रहा था…माई खड़ा होके माँ की टैंगो के पास बैठ गया और उनकी सलवार को बिल्कुल उतार दिया। माँ की गोरी गोरी तांगे और चिकनी जंघे काफी लुभावनी दिख रही थी। मैंने माँ की टैंगो और जंघो को चूमा तो माँ के पूरे बदन में करंट सा लग गया हो ऐसे झटके मारने लगी। माँ ने भी मेरी जीन्स को खोल दिया और नीचे खींचने लगी। अब माँ ने मेरे लंड को अंडरवियर के साथ ही पकड़ लिया था। अंडरवियर के अंदर मेरा लंड काफी टाइट हो चुका था और झटके लग रहा था।
माँ के स्पर्श से मुझे लगा कि अंडरवियर फ़ैड के मेरा लंड बाहर निकल आएगा। माई अब मॉम की टैंगो के बीच झुक गया और मॉम की पैंटी के ऊपर मेरा मुँह रगड़ने लगा। माँ की चूत के पानी की गंध मेरे मुँह में घुस कर मुझे मदहोश करने लगी। पैंटीलाइन से बाहर निकले हुवे काले काले बालो में भी मेरा मुँह रगड़ने लगा।
माँ की सिसकारियाँ काफी तेज़ हो चुकी थी। माँ ने मेरे लंड को अंडरवियर की कैद से आज़ाद कर दिया। मेरा लंड हवा में फैन हो गया था। माँ ने उसे मुठी में पकड़ के भैंस दिया। मैंने भी माँ की पैंटी को नीचे खींच लिया और इस चूत को देखना चाहा जहाँ से मैं इस दुनिया में आया था। माँ ने अपने कुल्हे ऊपर उठाए मुझे अपनी पैंटी उतारने में सहयोग किया।
ओह्ह…मैं देखता ही रह गया। माँ का पूरा बदन जितना गोरा था इतनी ही काली उनकी चूत थी। आस पास काले घने बालो का जंगल था जो गिलेपन की वजह से चमक रहा था। मैंने माँ के बालो को साइड में किया तो काफी लम्बा चीरा नज़र आया जो डोनो साइड से ढीली चामड़ी के पैड से धनका हुवा था और जिसके बीच में से लगतार पानी निकल रहा था। मैने आला ज़ुक के माँ की चूत को चूम लिया।
माँ की चूत का पानी मेरे मुँह में लगा और मैं होश खो बैठा। मैंने मेरी जीभ निकालकर माँ की चूत को कुत्ते की तरह चाटने लगा। माँ चटपटाने लगी और मेरे लंड को खिंचने लगी। मैंने माँ की चूत की दोनों प्रशंसकों को बहार की और कर दिया तो बिच में बिल्कुल गुलाबी रंग की चमक के परतें बनी हुई थीं। नीचे की तरफ जो होल था उसमें से पानी निकल रहा था।
मैंने अब मेरी जीभ को इस छेद के अंदर डालने की कोशिश करके चाटने लगा तो माँ ने मेरे लंड को छोड़ दोनों हाथों से मेरे शरीर को पकड़ लिया और चूत में से पानी की और तेज़ धार छूटी। शायद माँ जाद चुकी थी। अब माँ ने मुझे धक्का देके अलग किया और बोली “मधु, अब ज्यादा मत तड़पा, डाल दे मेरी चूत में। तेरा लंड डाल दे…बहुत हो गया…अब रहा नहीं जाता…।”“हा मेरी शब्बो” मैंने कहा और माँ की चूत के ऊपर मेरा लंड को रगड़ने लगा। माँ अपने कुल्हो को ऊपर उठा के मेरे लंड को चूत में लेने के लिए तड़प रही थी।
मैंने लंड का सुपाड़े को माँ की चूत के बीच लगा दिया और धीरे से धक्का देके 2 इंच जितना लंड अंदर कर दिया। माँ आला से हाय zatake marne लगी थी. मेरा लंड अपने आप ही अंदर घुस गया। माँ की चूत पहले से भी ज्यादा गिली हो गई। शायद वो फिर से ख़त्म हो गयी थी। फिर मैंने एक ज़ोर से धक्का देके मेरा पूरा लंड माँ की चूत से उतार दिया…..ओह्ह्ह्ह….आह्ह्ह्ह…आह्ह्ह्ह…
माँ सिस्कारिया मर रही थी. माँ ने अपनी दोनों तांगे हवा में उठाके मेरे टैंगो के ऊपर लगा ली…और मैं तेज धक्के मारने लग गया…पूरा कमरा उहह…आहह…कि कराहो से गूंज रहा था…मेरी माँ मुझे बार बार मधु…मधु कह के पुकार रही थी…मैं भी भूल गया कि मैं खुद मेरी माँ को चोद रहा हूँ था…इस चूत को पेल रहा था जिस चूत से मैंने दर्द उठाया था…मेरे लिए वो सिर्फ शबेरा बन गई और मैं उनके लिए मधु बन गई।
माँ की चूत काफी चिकनी और फेल हुई थी…फिर भी बहुत सनसनीखेज थी। मैंने फिर एक ज़ोर का झटका दिया और मेरे लंड से पानी टपकाने लगा। मैंने माँ को ज़ोर से मेरे साथ भींच लिया और फिर निहाल होके शांत हो गया…बहुत देर तक हम ऐसे ही पड़े रहे…फिर माँ ने मुझे नीचे उतारा और मुझे चूमते हुए कहा लगी “वाह मेरे मधु,
मेरे राजा…कई सालो के बाद तेरा प्यार पके मैं आज मर भी जाऊं तो कोई गम नहीं” फिर हम दोनों ने सफाई की और कपड़े पहने क्यों कि अब आयशा भी आ सकती थी। इस दिन से लेके आज तक हम को जब भी मौका मिलता है मैं मेरी माँ को मधु बनके प्यार करता हूँ। शबेरा ने मुझे जन्म तो दिया है मगर मेरी सच्ची माँ तो सुनंदा ही है। शबेरा मेरी बिन ब्याही बीवी ही है.
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